Skip to main content

अब और कितनी देर

अब और कितनी देर मैं रुकूंगा और करूँगा इंतज़ार
और कितनी देर मैं रुकूंगा बार बार
बस बहूत हुआ अब तो मुझे उड़ने दो
पंख पसार उन हवाओं में आसमां छूने दो
भूल गया अब सब कुछ की कैसे मैं भागा दौड़ा करता था
कैसे मैं कभी ये और कभी वो किया करता था
कैसे मैं सब से मिलता था कैसे मैं सब में रहता था
अब और कितनी देर...

Comments